Nipah Virus History: क्या है Nipah Virus, जानें History,Symptoms,Treatment

Nipah Virus History: केरल में निपाह वायरस (NiV) संक्रमण फैलने के बाद राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (National Centre for Disease Control) ने पूरे देश में हाई अलर्ट जारी किया है. पिछले दो हफ्तों में इस वायरस ने दक्षिणी राज्य केरल में लगभग 17 लोगों की जान ले ली है. निपाह वायरस (NiV) संक्रमण एक नया उभरती हुई बीमारी है जो जानवरों और मनुष्यों दोनों में गंभीर बीमारी का कारण बनती है. वायरस के प्राकृतिक मेजबान पटरोपोडिडे परिवार, पटरोपस जीनस (Pteropodidae Family, Pteropus genus) के फल खाने वाले चमगादड़ हैं.

Nipah Virus History
Nipah Virus History

Nipah Virus History: क्या यह पहला निपाह वायरस का प्रकोप है?

नहीं. भारत, बांग्लादेश, थाईलैंड, कंबोडिया, फिलीपींस, लाओस और मलेशिया में पहले भी ये वायरस कहर बरपा चुका है. NiV की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया के कम्पुंग सुंगई निपाह में बीमारी फैलने के दौरान हुई थी. उस समय सूअर से ये वायरस फैला था. 2004 में बांग्लादेश में, संक्रमित फल खाने वाले चमगादड़ से दूषित खजूर के रस का सेवन करने के बाद मनुष्य निपाह वायरस से संक्रमित हो गए थे.

Nipah Virus History: पहली बार निपाह वायरस की पहचान कब हुई थी?

1998 में – मलेशिया, NiV की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया के कम्पुंग सुंगई निपाह में हुई बीमारी के प्रकोप के दौरान हुई थी. उस समय सूअर से ये वायरस फैला था.

बांग्लादेश में 2004- 2004 में बांग्लादेश में, संक्रमित फल खाने वाले चमगादड़ से दूषित खजूर के रस का सेवन करने के परिणामस्वरूप मनुष्य NiV से संक्रमित हो गए.

Nipah Virus History: Who is at high risk ? How is it transmitted

  • सबसे ज्यादा खतरे में कौन है? यह कैसे फैलता होता है?
  • सूअरों के साथ काम करने वाले और सूअर खाने वाले लोग खतरे की स्थिति में हैं. वे निपाह वायरस से प्रभावित हो सकते हैं.
  • अभी चमगादड़ों के संपर्क में आने वाले किसानों पर ज्यादा खतरा है.
  • ऐसे फलों का सेवन करना जो पहले से ही चमगादड़ द्वारा काटे गए हों.
  • ऐसे लोगों से संपर्क करें जिन्हें पहले से निपाह वायरस का संक्रमण है.

Nipah Virus History: What are early symptoms ? शुरुआती लक्षण क्या हैं?

  • निपाह वायरस से संक्रमण इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) से जुड़ा होता है.
  • प्रारंभिक लक्षण में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, मतली और उल्टी है.
  • गर्दन में अकड़न और फोटो फोबिया
  • रोग तेजी से बढ़ता है, चेतना में गिरावट के साथ
  • मरीज पांच से सात दिनों के भीतर कोमा में चला जाता है.

Nipah Virus History: Nipah Virus Patient diagnosed ? निपाह वायरस रोगी का निदान कैसे किया जाता है?

निदान एलिसा द्वारा किया जाता है जो वर्तमान में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे (National institute of Virology, Pune) में किया जाता है.

Nipah Virus History: How do I prevent from Nipah Virus or What precautions?

  • मैं निपाह वायरस से कैसे बचाव करूं या आपको कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए?
  • सूअर और सुअर संचालकों के संपर्क से बचें.
  • व्यक्तिगत स्वच्छता और खाने से पहले हाथ धोएं
  • कच्चे फलों को खाने से बचें.
  • केवल अच्छी तरह से पका हुआ, साफ, घर का बना खाना ही खाएं.
  • व्यक्ति से व्यक्ति के फैलाव से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर यात्रा या काम करते समय अधिमानतः एन 95 मास्क का उपयोग करें.
  • लक्षणों से अवगत रहें और शीघ्र निदान और उपचार के लिए तुरंत डॉक्टर को रिपोर्ट करें.

Nipah Virus History: Nipah Virus Key Facts निपाह वायरस मुख्य तथ्य

निपाह वायरस एक आरएनए वायरस है जो पैरामाइक्सोविडे परिवार का हिस्सा है जिसे पहली बार 1998 और 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में मनुष्यों में सूअरों में गंभीर सांस की बीमारी और मनुष्यों में एन्सेफलाइटिक बीमारी के प्रकोप के बाद एक जूनोटिक रोगज़नक़ के रूप में पहचाना गया था. निपाह वायरस घरेलू पशुओं जैसे सूअरों में कई प्रकार की हल्की से लेकर गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है.

1998-99 में निपाह विषाणु रोग के प्रकोप के दौरान 265 रोगी इस विषाणु से संक्रमित थे. गंभीर तंत्रिका रोग के साथ अस्पतालों में प्रवेश करने वाले लगभग 40% रोगियों की बीमारी से मृत्यु हो गई.

निपाह वायरस जानवरों (चमगादड़, सूअर) से इंसानों में फैल सकता है और सीधे इंसान से इंसान में भी फैल सकता है. पटरोपोडिडे परिवार के फल खाने वाले चमगादड़ निपाह वायरस के प्राकृतिक वाहक हैं. लोगों या जानवरों के लिए कोई इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है. मनुष्यों के लिए प्राथमिक उपचार की इसका इलाज है. निपाह वायरस डब्ल्यूएचओ की ब्लूप्रिंट प्राथमिकता वाली बीमारियों की सूची में है.

Nipah Virus History: घरेलू पशुओं में निपाह वायरस

सूअरों और अन्य घरेलू जानवरों (घोड़ों, बकरियों, भेड़, बिल्लियों और कुत्तों) में निपाह का प्रकोप पहली बार 1999 में मलेशियाई प्रकोप के दौरान दर्ज किया गया था. सूअरों में निपाह वायरस अत्यधिक संक्रामक है. ऊष्मायन अवधि के दौरान सूअर संक्रामक होते हैं, जो 4 से 14 दिनों तक रहता है (Nipah virus is highly contagious in pigs. Pigs are infectious during the incubation period, which lasts from 4 to 14 days).

निपाह वायरस से संक्रमित सुअर में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते हैं. लेकिन कुछ में तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, और तंत्रिका संबंधी लक्षण जैसे कांपना, मरोड़ना और मांसपेशियों में ऐंठन जैसे लक्षण दिखते हैं.

Nipah Virus History in Hindi: निपाह वायरस ट्रांसमिशन

मनुष्यों में निपाह वायरस का फैलाव संक्रमित चमगादड़ों, संक्रमित सूअरों या अन्य NiV संक्रमित लोगों के सीधे संपर्क में आने के बाद हो सकता है.

मलेशिया और सिंगापुर में, संक्रमित सूअरों के निकट संपर्क के माध्यम से ही मनुष्य स्पष्ट रूप से निपाह वायरस से संक्रमित थे. इस प्रकोप में पहचाने गए NiV स्ट्रेन को शुरू में चमगादड़ से सूअरों में फैलता बताया गया था, बाद में ये सुअरों की आबादी में फैल गया. संक्रमित सूअरों के संपर्क में आने के बाद मानव में संक्रमण फैला.

इसके विपरीत, बांग्लादेश और भारत में निपाह वायरस का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ट्रांसमिशन हुआ. यह आमतौर पर निपाह वायरस से संक्रमित रोगियों के परिवार और देखभाल करने वालों में हुआ. संक्रमित चमगादड़ के सीधे संपर्क में आने से भी ट्रांसमिशन होता है.

ये भी पढ़ें- What is Nipah virus: क्या है निपाह वायरस, जानें पूरी डिटेल

ये भी पढ़ें- Nipah Virus Infection: Covid-19 के बढ़ते मामलों के बाद, केरल में अब निपाह वायरस का कहर

ट्रेंडिंग न्यूज,  सरकारी नौकरी और सरकारी रिजल्ट, आईपीएल 2021, टी20 विश्वकप 2021, टेक न्यूज और हेल्थ न्यूज के लिए Oxygen Pillow News के साथ बने रहें।

Leave a Comment